इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF): उपचार का अवलोकन

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक प्रक्रिया है जिसमें अंडाशय से एक अंडा निकाला जाता है और उसे प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ निषेचित किया जाता है1। इसके परिणामस्वरूप बनने वाला भ्रूण फिर गर्भाशय में विकास और बढ़ने के लिए प्रत्यारोपित किया जाता है1।

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, या आईवीएफ, एक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें शरीर के बाहर गर्भावस्था स्थापित की जाती है2। यह प्रक्रिया प्रयोगशाला में अंडे और शुक्राणु को एक साथ लाती है, जिससे निषेचन होता है और फिर परिणामी भ्रूण को गर्भाशय में स्थापित किया जाता है1,2। यह मार्गदर्शिका आधिकारिक चिकित्सा स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर आईवीएफ उपचार के चरणों की व्याख्या करती है।

आईवीएफ क्या है

आईवीएफ (IVF) एक महिला के अंडे और एक पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में मिलाने की प्रक्रिया है2। यह प्रक्रिया विशेष चिकित्सा तकनीकों का उपयोग करके एक महिला को गर्भवती होने में मदद करती है2।

अंडा पुनर्प्राप्ति के लिए तैयारी

अंडा एकत्र करने से पहले, महिला के शरीर को प्रजनन दवाओं का उपयोग करके तैयार किया जाता है ताकि अंडा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके2। ये दवाएं अंडाशय को कई अंडे बनाने का संकेत देती हैं, जबकि सामान्यतः एक महिला प्रति माह केवल एक अंडा बनाती है2। कुछ मामलों में, दवा से मासिक धर्म चक्र को दबा दिया जाता है, और अल्ट्रासाउंड स्कैन का उपयोग अंडों के विकास की जांच करने के लिए किया जाता है, जबकि आगे की दवा उन्हें परिपक्व करने में मदद करती है1। इसके बाद, अंडों को एक छोटी सी सर्जरी के माध्यम से महिला के शरीर से निकाला जाता है जिसे फॉलिकुलर एस्पिरेशन कहा जाता है2।

अंडा एकत्रण और निषेचन

अंडा प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान, एक चिकित्सक अल्ट्रासाउंड छवियों का मार्गदर्शन लेते हुए योनि के माध्यम से अंडाशय और अंडों से युक्त रोमों में एक पतली सुई डालते हैं2। इसके बाद, प्रत्येक रोम से अंडों और तरल पदार्थ को एक-एक करके निकालने के लिए एक चूषण उपकरण का उपयोग किया जाता है2। फिर अंडों को कुछ दिनों के लिए शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है ताकि निषेचन हो सके1। यदि चिकित्सक को निषेचन की संभावना कम लगती है, तो शुक्राणु को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जा सकता है, जिसे इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) नामक एक तकनीक है2। एक बार जब अंडा निषेचित हो जाता है, तो यह विभाजित होकर भ्रूण बन जाता है2। प्रयोगशाला कर्मचारी नियमित रूप से भ्रूण की जाँच करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह ठीक से बढ़ रहा है, और लगभग पाँच दिनों के भीतर, एक सामान्य भ्रूण में कई कोशिकाएँ होती हैं जो सक्रिय रूप से विभाजित हो रही होती हैं2।

भ्रूण स्थानांतरण

अंडा पुनःप्राप्ति और निषेचन के 3 से 5 दिन बाद भ्रूणों को महिला के गर्भाशय में रखा जाता है2। प्रदाता यह प्रक्रिया कार्यालय में करते हैं जबकि महिला जागती रहती है2। एक पतली नली जिसे कैथेटर कहा जाता है, जिसमें भ्रूण होते हैं, को महिला के योनि में डाला जाता है, गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से, और गर्भाशय में ऊपर की ओर2। आमतौर पर एक या दो निषेचित अंडे, जिन्हें भ्रूण के रूप में जाना जाता है, को गर्भाशय में रखा जाता है1। एक ही समय में एक से अधिक भ्रूण को गर्भाशय में रखा जा सकता है, जिससे जुड़वाँ, तीन बच्चे या अधिक हो सकते हैं2।

भ्रूण स्थानांतरण के बाद

भ्रूण को गर्भाशय में रखने के बाद, महिला को दिन के बाकी समय के लिए आराम करने के लिए कहा जा सकता है2। जो महिलाएं IVF कराती हैं, उन्हें भ्रूण स्थानांतरण के बाद 8 से 10 सप्ताह तक प्रतिदिन प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के इंजेक्शन या गोलियां लेनी होती हैं2। प्रोजेस्टेरोन एक हार्मोन है जो अंडाशय द्वारा स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है और गर्भाशय की परत को तैयार करता है ताकि भ्रूण जुड़ सके और स्थापित हो सके2। गर्भावस्था होने के बाद यह हार्मोन समर्थन 8 से 12 सप्ताह तक जारी रह सकता है2। उपचार सफल रहा है या नहीं, यह देखने के लिए भ्रूण स्थानांतरण के लगभग 12 से 14 दिन बाद गर्भावस्था परीक्षण किया जाता है1,2।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या आईवीएफ में दाता अंडे या शुक्राणु का उपयोग किया जा सकता है?

यह प्रक्रिया दाता के अंडे और शुक्राणु का उपयोग करके भी की जा सकती है1। यदि कोई महिला अंडे उत्पन्न नहीं कर पाती है या अंडे उत्पन्न करने में असमर्थ है, तो दाताओं से प्राप्त अंडे का उपयोग किया जा सकता है2।

इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन क्या है और इसका उपयोग कब किया जाता है?

इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) एक ऐसी तकनीक है जिसमें शुक्राणु को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है2। यदि प्रदाता को निषेचन की संभावना कम लगती है तो इसका उपयोग किया जाता है2।

तुरंत उपयोग में न आने वाले भ्रूणों के साथ क्या किया जा सकता है?

जिन भ्रूणों का तुरंत उपयोग नहीं किया जाता है, उन्हें भविष्य में प्रत्यारोपण या दान करने के लिए जमा किया जा सकता है2।

क्या आईवीएफ के दौरान आनुवंशिक जांच उपलब्ध है?

प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस (PGD) प्रयोगशाला वैज्ञानिकों को निषेचन के 3 से 5 दिन बाद प्रत्येक भ्रूण से एक या कुछ कोशिकाएँ निकालने की अनुमति देता है, ताकि विशिष्ट आनुवंशिक विकारों की जाँच की जा सके2।

किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया की तरह, इसमें भी जोखिम शामिल हैं; कृपया इस बारे में डॉक्टर से सलाह लें।

स्रोत

  1. NHS — NHS
  2. MedlinePlus (NIH) — MedlinePlus (NIH)